Wednesday, September 15, 2010

श्री विश्वकर्मा चालीसा

"दोहा"
श्री विश्वकर्मा प्रभुको वन्दु
चरण कमल धरी ध्यान
श्री शंभु बल अरू श्रीपगण
दिजे दया निधान

जय जय श्री विश्वकर्मा प्रभु सकल
सृष्टी के कर्ता रक्षकश्रुतीधर्मा

जय जय श्री विश्वकर्मा भगवाना
जय जय श्री विश्वेश्वर कृपा निधाना

शिल्पचर्य परम उपकारी
भुवन पुत्र नाम गुणकारी

अष्टम बसु सुत नगर
शिल्प ग्यान जग किउ उजागर

अद्भुत सकल सृष्टी कर्ता
सत्य ग्यान सृष्टी जग हित धर्ता

अतुल तेज तुम्हारो जग मही
कोई विश्व मही जानत नही

विश्वसृष्टी कर्ता विश्वेशा
अद्भुत वरण विराज सुवेशा

एकानन पंचानन राजे
द्विभुज चतुर्भुज दशभुज काजे

चक्र सुदर्शन धरन किजे
वारी कमंडल हाथ लिजे

शिल्प शस्त्र अरू शंख अनुपम
सोहे सुत्र गजमाप अनुपा

धनुष्य बाण त्रिशुल सोहे
नवले हाथ कमल मन मोहे

विविध शस्त्र सहित मंत्र अपारा
वीरहु तरण समस्त संसारा

दिव्य सुगंधित सुमन अनेका
विविध महा औषध विवेका

शंभु वीर विष्णु सुरपाला
वरूण कुबेर असि महाकाला

तुम्हारे प्रति सब मिलकर गावऊ
करि प्रमाण अस्तुती कवाऊ

मै प्रसन्न तुम लखी सुर सौका
कियऊ काज सब भये अशोका

दर्शव वरद हस्त जग हेतु
अतिभव सिंदु मही वे सेतु

सुरज तेज हरण तुमने जो किजे
अस्त्र शस्त्र जिससे निर्मीजे

चक्र शक्ती व्रज त्रिशुल एको
दंड पाशा और शस्र अनेको

विष्णुही चक्र त्रिशुल शंकरही
अजही शक्ती दंड यमराजही

इंद्र हे व्रज वरूण हे पाशा
तुमने सबकी पूर्ण की आशा

भांती भांती के अस्त्र रचायें
सत् पंथ को प्रभु सदा बचायें

अमृत घट के तुम निर्माता
साधुसंत भक्तोंके सुरत्राता

लोह, काष्ठ, तांबा, पाषाणा
सुवर्ण शिल्प के परम सुजाना

विद्युत, अग्नी, पवन भु वरी
इनके काज अद्भुत की सवारी

आनपान हित भाजन नाना
भुवन विभुषित विविध विधाना

रिद्धी - सिद्धी के तुम वरदाता
वेद ग्यान के हो आप ही ग्याता

शिल्पी, त्वष्ठा, मनु, मय, तक्षा
सबकी नीत करते प्रभु रक्षा

पंचपुत्र नीत जग हित कर्ता
कर निष्काम कर्म निज धर्मा

तुम्हारे सम कोई कृपालू नही
विपदा हरे सदा जग मही

जय जय श्री भुवन विश्वकर्मा
कृपा करे श्री गुरूदेव सुधर्मा

श्री अरू विश्वकर्मा मही
विग्यानी कहे अंतर नही

बने कौन स्वरूप तुम्हारा
सकल सृष्टी को तुम विस्तारा

रचे विश्व हित त्रिविध शरीरा
तुम बिन हरे भव पिडा

मंगल मुळ भुवन भय हारी
शके रहित त्रिलोक विहारी

चारो युग प्रताप तुम्हारा
ते हे प्रसिध जगत उजियारा

एकशोध अत जप करे कोई
नाशो विपत्ती महा सच कोई

पढे जो श्री विश्वकर्मा चालीसा
होय सिध्दी साकी गौरीसा

विश्व विश्वकर्मा प्रभु मेरा
हो प्रसन्न मै बालक तेरा

तुम सदा इष्टदेव हमारा
सदा वसो प्रभु मन मे हमारा

इति श्री विश्वकर्मा चालीसा

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